नई दिल्ली: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को प्रवेश की अनुमति न दिए जाने के मामले ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को महिला सम्मान और समानता से जोड़ते हुए एनडीए सरकार पर तीखा हमला किया है।
बिहार कांग्रेस का बयान
बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी से सीधा सवाल पूछा है कि क्या वे भी इस ‘तालिबानी सोच’ के समर्थन में खड़े हैं। उन्होंने कहा, “आधी आबादी का अपमान अब देश नहीं सहेगा।”
राजेश राम ने कहा, “नई दिल्ली में महिला पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस में रोकना भारतीय लोकतंत्र और संस्कृति पर गहरा प्रहार है। यह घटना बीजेपी के नेतृत्व में फैल रही ‘तालिबानी मानसिकता’ का संकेत है।” उन्होंने यह भी कहा कि जो सोच महिलाओं को शिक्षा, आवाज और अधिकार से वंचित करती है, वही अब हमारे लोकतंत्र में जगह बना रही है।
बाबा साहेब अंबेडकर का संदर्भ
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि क्या बीजेपी की ‘नया भारत’ की परिभाषा अब महिलाओं को मंच और माइक से दूर रखना है। उन्होंने एनडीए के सभी घटक दलों से पूछा कि क्या वे इस अपमानजनक घटना पर मौन रहकर उसे सही ठहरा रहे हैं। राजेश राम ने कहा, “यह देश बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान पर टिका है, किसी आमिर खान मुत्ताकी या तालिबान की सोच पर नहीं। भारत की महिलाएं इस तालिबानी मानसिकता को कभी स्वीकार नहीं करेंगी।”
विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण
इस विवाद के बाद भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन अफगानिस्तान के दूतावास ने किया था और इसमें भारत के विदेश मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं थी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली में अफगान दूतावास स्वतंत्र रूप से कार्य करता है और यह कार्यक्रम पूरी तरह उसी का था।
आमिर खान मुत्ताकी का भारत दौरा
जानकारी के अनुसार, आमिर खान मुत्ताकी भारत के सात दिन के दौरे पर हैं। 10 अक्टूबर को उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी, लेकिन अब यह घटना राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बहस का विषय बन गई है। खासकर बिहार में, जहां कांग्रेस इसे महिला वोटरों के बीच बड़ा चुनावी मुद्दा बना रही है।
बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले नीतीश सरकार ने आधी आबादी महिला वोटरों को साधने के लिए योजनाओं की झड़ी लगा दी है, जबकि कांग्रेस पार्टी भी लगातार महिला वोटरों को साधने के लिए एनडीए पर हमला कर रही है।
इस प्रकार, यह मामला न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बन गया है, जो महिलाओं के अधिकारों और समानता के मुद्दे को उजागर करता है।