ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। पिछले साल देश में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद पद छोड़ने पर मजबूर हुईं हसीना के खिलाफ बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने अरेस्ट वारंट जारी किया है। उन पर आरोप है कि अवामी लीग सरकार के दौरान सैकड़ों लोगों को जबरन गायब कराया गया।
मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप
इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने बुधवार को शेख हसीना और उनकी सरकार के कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किया। रिपोर्ट के अनुसार, हसीना और 29 अन्य लोगों पर राजनीतिक विरोधियों को हिरासत में लेने, टॉर्चर करने और उन्हें देश की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सीक्रेट ठिकानों से गायब करने का आरोप है।
आरोपों का विवरण
पहले मामले में, हसीना और उनके पूर्व सुरक्षा और डिफेंस सलाहकार तारिक अहमद सिद्दीकी समेत 13 लोगों के खिलाफ पांच आरोप लगाए गए हैं। दूसरे मामले में, हसीना, सिद्दीकी और 15 अन्य लोगों पर आरोप है कि उन्होंने रैपिड एक्शन बटालियन की टास्क फोर्स इंटरोगेशन यूनिट के सीक्रेट सेल में बंद कैदियों के गायब होने और टॉर्चर में भूमिका निभाई।
विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले
जुलाई 2024 में हुए छात्र आंदोलन के दौरान रामपुरा हत्याकांड में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के लेफ्टिनेंट कर्नल रेडवान अहमद और तीन अन्य के खिलाफ भी आरोप पत्र दायर किया गया है। ये घटनाएं हसीना सरकार के पतन के बाद की हिंसा से जुड़ी हैं, जिसमें 600 से अधिक मौतें हुईं। ट्रिब्यूनल ने इन सभी को मानवता के खिलाफ अपराध माना है।
भारत में शरण
शेख हसीना ने पिछले साल 5 अगस्त को पद से इस्तीफा देने के बाद भारत में शरण ली थी। आवामी लीग की सरकार गिरने के बाद से उनके खिलाफ कई मामलों में अरेस्ट वारंट जारी किए गए हैं और कई मुकदमे कोर्ट में विचाराधीन हैं। इस बीच, 78 वर्षीय हसीना की भारत से वापसी को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा है कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।