भाजपा नेता के भाई की गुंडई, हॉस्टल में घुसकर छात्र पर तान दी बंदूक, छात्रों ने किया प्रदर्शन

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उज्जैन (मध्य प्रदेश): विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में एक बार फिर छात्रों का आक्रोश सामने आया है। शुक्रवार को छात्रों ने एक कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट को बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का दावा है कि आरोपी कर्मचारी ने नशे की हालत में हॉस्टल में घुसकर एक छात्र से मारपीट की और उस पर पिस्टल तान दी। हंगामे के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारी को निलंबित कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

घटना विक्रम विश्वविद्यालय के शालिग्राम हॉस्टल की है, जहां बीएससी एग्रीकल्चर थर्ड ईयर का छात्र व्यंकटेश आलोक (निवासी: बिहार) रहता है। गुरुवार रात लगभग 11 बजे, व्यंकटेश अन्य छात्रों के साथ खाना खाने गया था। वापस लौटने पर हॉस्टल का चैनल गेट बंद मिला। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी उदय सिंह सेंगर, जो कथित रूप से नशे की हालत में था, ने गेट खोलने से पहले गाली-गलौज करते हुए विवाद शुरू कर दिया।

रात में हुआ विवाद, सुबह और बिगड़ा मामला

रात में मामला किसी तरह शांत हो गया, लेकिन शुक्रवार सुबह लगभग 6:30 बजे, आरोपी सेंगर छात्र के कमरे पर लात मारते हुए जबरन घुस आया और व्यंकटेश से मारपीट की। इतना ही नहीं, उसने कथित रूप से छात्र के सिर पर पिस्टल तानकर धमकी दी। छात्र के शोर मचाने पर अन्य छात्र मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी वहां से फरार हो गया।

एफआईआर दर्ज कराने की मांग

घटना की जानकारी मिलते ही हॉस्टल के चीफ वार्डन प्रो. डीडी बेदिया, प्रो. कानिया मेड़ा और प्रो. गणपत अहिरवार मौके पर पहुंचे। छात्रों ने पूरी घटना का लिखित आवेदन वार्डन को सौंपा और फिर सभी छात्र माधवनगर थाने पहुंच गए। वहां वे आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़े रहे।

विश्वविद्यालय में प्रदर्शन और तालाबंदी

आक्रोशित छात्रों ने शुक्रवार को यूनिवर्सिटी में तालाबंदी कर दी। उन्होंने मुख्य गेट बंद कर कुलसचिव डॉ. अनिल शर्मा के कार्यालय का घेराव किया और आरोपी कर्मचारी को बर्खास्त करने की मांग की। छात्र आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने उदय सिंह सेंगर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

आरोपी कर्मचारी के राजनीतिक संबंध

जानकारी के अनुसार, उदय सिंह सेंगर भाजपा नगर उपाध्यक्ष उमेश सिंह सेंगर का भाई है। इस राजनीतिक जुड़ाव को लेकर भी छात्रों में रोष देखा गया। छात्रों का कहना है कि राजनीतिक संरक्षण की वजह से आरोपी अब तक बेखौफ था।

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