मध्य प्रदेश की राजनीति 31 मई को एक दिलचस्प मुकाबले की गवाह बनेगी—एक तरफ भोपाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे, तो दूसरी ओर कांग्रेस जबलपुर में ‘जय हिंद सभा’ के नाम से शक्ति-प्रदर्शन करेगी।
कांग्रेस की रैली का मंच सेना की बड़ी छावनियों वाले जबलपुर में इसलिए चुना गया है कि पार्टी इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सशस्त्र बलों की वीरता को सलाम करने के राष्ट्रीय अभियान का प्रमुख पड़ाव बताना चाहती है। पूर्व मुख्यमंत्रियों कमल नाथ और भूपेश बघेल सहित कई वरिष्ठ नेता यहां सैनिक सम्मान, संविधान-सम्मान और ‘लोकतंत्र बचाओ’ को केन्द्रीय मुद्दा बनाएंगे।
राज्य कांग्रेस के मीडिया समन्वयक अभिनव बरोलिया का कहना है कि सभा में उन आपत्तिजनक बयानों और “मोदी सरकार की खामोशी” को भी निशाना बनाया जाएगा, जिन्हें भाजपा नेताओं ने हाल में सेना और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर दिया था। कांग्रेस का तर्क है कि भाजपा सैनिकों की उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री को देकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है।
रैली की तैयारी के लिए कटनी में हुई समीक्षा बैठक में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से ‘विचारधारा की निर्णायक लड़ाई’ के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा “तानाशाही मानसिकता” से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और कांग्रेस जनों को झूठे मामलों से डराने की कोशिश कर रही है—लेकिन “संविधान बचाने की यह लड़ाई” डर से नहीं, हौसले से लड़ी जाएगी।
भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा है कि भोपाल में प्रधानमंत्री की महिला महासभा ऐतिहासिक होगी और कांग्रेस का जबलपुर-इवेंट “खुद के भीतर की गुटबाज़ी” में दम तोड़ देगा। पार्टी प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी के मुताबिक जनता “कांग्रेस की विभाजनकारी राजनीति” और मोदी सरकार की आतंकवाद-नीति में साफ फर्क देखती है।