बाड़मेर, राजस्थान: राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने मंगलवार को बाड़मेर में तेजा दशमी के मौके पर एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राजस्थान की राजनीति में हलचल मचा दी है। धोरीमना के भीमथल गांव में आयोजित तेजाजी मंदिर मेले में बेनीवाल ने सरकार और मंत्रियों पर जमकर निशाना साधा, जिससे सियासी पारा चढ़ गया है।
सरकार पर सीधा हमला: ‘उल्टी गिनती शुरू’
बेनीवाल ने अपने भाषण में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा, “तेजा दशमी के दिन कह रहा हूं, भजनलाल की उलटी गिनती शुरू हो गई है।” उनके इस बयान को आगामी राजस्थान चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री केके बिश्नोई को भी खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह उनका कार्यकाल पूरा नहीं होने देंगे।
युवाओं के मुद्दों पर सरकार को घेरा
हनुमान बेनीवाल ने युवाओं के मुद्दों को उठाते हुए बीजेपी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने युवाओं के सपनों को कुचला है। हालांकि, एसआई भर्ती का हाईकोर्ट से रद्द होना उन्होंने “तेजा भक्तों की बड़ी जीत” बताया। बेनीवाल ने राजस्थान को “फर्जी डिग्रियों का गढ़” बताते हुए दावा किया कि दिल्ली में भी लोग उनसे फर्जी डिग्रियों के बारे में जानकारी मांगते हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे थकने वाले नहीं हैं और सबको “ठीक” करेंगे।
जाट समाज और राजनीतिक भेदभाव का मुद्दा
बेनीवाल ने जाट समाज के साथ कथित राजनीतिक भेदभाव का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 70 साल में जाट समाज से कोई गृह मंत्री नहीं बना और पीएम मोदी के पहले मंत्रिमंडल में भी एक भी जाट कैबिनेट मंत्री नहीं था। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को हटाए जाने पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “धनखड़ साहब, बोलो, दिल्ली घेर लेंगे।” इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस पर भी कर्नल सोनाराम चौधरी के निधन पर उनके पार्थिव शरीर को सम्मान न देने का आरोप लगाया।
कांग्रेस-बीजेपी नेताओं को आरएलपी में आने का न्योता
बेनीवाल ने कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं से अपनी पार्टी में शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा, “कब तक दूसरों के दल में रहोगे, आओ, कंधे से कंधा मिलाकर राजस्थान के लिए लड़ें।” उन्होंने अपने समर्थकों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव दिखाते हुए कहा कि वे और नए लोग तैयार करेंगे, जिससे पार्टी को मजबूती मिलेगी। बेनीवाल का यह आक्रामक रुख राजस्थान की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है।