नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुतक्की द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को शामिल नहीं किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस तरह के भेदभाव पर चुप रहना देश की महिलाओं के प्रति कमजोरी और असंवेदनशीलता का संकेत है।
राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, “मोदी जी, जब आप महिला पत्रकारों को किसी सार्वजनिक कार्यक्रम से बाहर किए जाने की अनुमति देते हैं, तो आप देश की हर महिला को यह बता रहे हैं कि आप उनके लिए खड़े होने में कमजोर हैं। हमारे देश में महिलाओं को हर क्षेत्र में समान भागीदारी का अधिकार है। ऐसे भेदभाव पर आपकी चुप्पी ‘नारी शक्ति’ के आपके नारों की खोखलापन उजागर करती है।”
विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण
विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस मामले में स्पष्ट किया है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्रालय का कोई हस्तक्षेप या भूमिका नहीं थी। मंत्रालय ने यह भी बताया कि महिला पत्रकारों को इस प्रेस इंटरैक्शन में शामिल न करने का निर्णय MEA का नहीं था।
राजनीतिक हलचल
अफगान विदेश मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को शामिल न किए जाने की खबर के बाद देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि जब महिला पत्रकारों को बाहर रखा गया, तो पुरुष पत्रकारों को तुरंत विरोध स्वरूप वॉकआउट करना चाहिए था। उन्होंने लिखा, “मैं स्तब्ध हूं कि महिला पत्रकारों को बाहर रखा गया। पुरुष पत्रकारों को तुरंत वॉकआउट करना चाहिए था।”
प्रियंका गांधी का सवाल
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि सरकार ने इस अपमानजनक स्थिति की अनुमति क्यों दी। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी जी, कृपया स्पष्ट करें कि तालिबान मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को क्यों हटाया गया? क्या आपके महिला अधिकारों के दावे सिर्फ चुनावी नारे हैं?”
टीएमसी सांसद का बयान
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इसे “हर भारतीय महिला का अपमान” बताते हुए कहा, “सरकार ने तालिबान मंत्री को महिला पत्रकारों को बाहर रखने की अनुमति देकर देश की हर महिला का अपमान किया है। यह शर्मनाक और रीढ़विहीन कदम है।”
इस घटना ने न केवल राजनीतिक हलचल पैदा की है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि महिलाओं के अधिकारों और समानता के मुद्दे पर देश में गहरी चिंता बनी हुई है।