मणिपुर में पिछले दो वर्षों से जारी जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच, अब एक नई सरकार के गठन की कवायद तेज़ हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में 44 विधायक सरकार बनाने के लिए तैयार हैं, जिनमें 30 भाजपा, 6 नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी), 5 नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ), 1 जनता दल (यूनाइटेड) और 2 निर्दलीय विधायक शामिल हैं। इस गठबंधन ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर सरकार गठन का दावा पेश किया है।
हालांकि, इस गठबंधन में कूकी-जो समुदाय के सात भाजपा विधायक शामिल नहीं हैं, जो राज्य में जारी जातीय तनाव को दर्शाता है। मणिपुर विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं, जिनमें से एक सीट रिक्त है, और वर्तमान में 59 विधायक हैं। बहुमत के लिए 31 विधायकों की आवश्यकता होती है, जबकि गठबंधन के पास 44 विधायकों का समर्थन है।
पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने फरवरी 2025 में इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। उनके इस्तीफे के पीछे राज्य में मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा और उनके नेतृत्व पर उठे सवाल थे।
अब सवाल उठता है कि यदि नई सरकार बनती है, तो मुख्यमंत्री कौन होगा? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा मैतेई समुदाय से ही किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बना सकती है, ताकि मैतेई वोट बैंक को बनाए रखा जा सके। थोकचोम राधेश्याम सिंह, जो इस गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, एक संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं।
मणिपुर में जातीय समीकरणों को देखते हुए, भाजपा के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण निर्णय होगा। कूकी-जो समुदाय की मांगें और मैतेई समुदाय की अपेक्षाएं दोनों को संतुलित करना आवश्यक होगा, ताकि राज्य में स्थायी शांति और विकास सुनिश्चित किया जा सके।
राज्यपाल के समक्ष सरकार गठन का दावा पेश करने के बाद, अब गेंद केंद्र सरकार और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के पाले में है। देखना होगा कि वे इस संवेदनशील स्थिति में क्या निर्णय लेते हैं, जिससे मणिपुर में स्थिरता और शांति की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके।